
जाड़ों की रात में जब ठंड बढ़ जाती है
शाम होते ही सन्नाटा पसरा जाता है
गली नुक्कड़ सूने हो जाते हैं
पड़ोस की दादी मां झोपड़ी से बाहर आती है
देख चारों ओर अंधेरा लालटेन लटका जाती है
शायद उसे फ़िक्र रहती है किसी अनजाने की
या कोई रात में बाहर निकले घर से
या कोई परेशानी हो सकती हैं अंधेरी रात में
ना जाने कब उजाले की जरूरत पड़ जाएं
ना जाने कब घना अंधेरा छा जाएं
ये बनेगी उस परेशानी में सहारा
एक रोशनी से जगमगा उठेगा जग सारा
किसी भटके हुए राही को दिखायेगी सही राह
या देगी रात में डरे सहमें बच्चे को हौंसले का उजाला
सिखायेगी जिंदगी का गीत सबको
हर अंधेरे के बाद आशाओं का सवेरा होगा
प्रिया काम्बोज प्रिया
सहारनपुर उत्तर प्रदेश











