
बापू की पुण्यतिथि है आज
शोक संतप्त है,पूरे समाज
आज को वो तारीख,याद है
बापू,अब नही हमारे साथ है
ऐसी ही एक खबर,फैली
और देश,शोक लहर मे फैली
ये क्या हो गया,और कैसे?
शहीद हुए या शहादत हुए जैसे?
जो भी हो,लेकिन बापू अब न रहे
सच है ये बाते,सबने कहे
दुखद अंत था,बापू का हमारे
जन जन के थे,वे प्यारे
गुलामी के जंजीरे तोड़ने वाले
सबो के लेकर,साथ थे चले
जिधर चल पड़ा था,उनके कदम
उधर ही उमड़ा था,लोगो का हुजूम
बापू के साहसी का सरहाना
लोगो के मुँह मे था,ही आना
कोई उसे महात्मा कहते
तो,कोई राष्ट्रपिता कहते
देखते ही देखते वो मोहनदास कर्मचंद
सबके हुए आवाज,बुलंद
आजादी के बिगुल बजाकर
सबको दिया एकत्रित कर
अंततः चलाया असहयोग आन्दोलन
और चलाया सविनय अवज्ञा संगठन
डांडी यात्रा से लेकर,करो या मरो का नारा
देकर सबका बना,बापू प्यारा
सबो के सहयोग,सबो के साथ से
हरेक लोगो ने थामे हाथ को हाथ से
और एकजुटता की बनी मिशाल
देश हुए आजाद,हुए सब खुशी से निहाल
फिर क्या था? होनी तो तय था
भला-बुरा तो सब जगह ही था
और एक शाम ,कुछ ऐसा हुआ
जिसकी अंदाजा किसी को न हुआ
हे राम;; आखिरी शब्द बापू के निकले
और हमसब को छोड़, सदा को गये,चले
30 जनवरी वो तारीख ही है
जो इतिहास मे,पुण्यतिथि के रूप मे दर्ज है
पुनः,चुन्नू कवि करते है सबो से निवेदन
पुण्यतिथि पर,बापू को करे नमन
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड











