
सत्य और अहिंसा के पुजारी,
बापु थारी महिमा हैं बड़ी भारी।
पैदल चलकर क्रांति की लहर चला दी,
बापु तुमने आजादी की अलख जगा दी।।
२ अक्टूबर १८६९ को जन्म हुआ,
माता पुतलीबाई,पिता कर्मचंद गांधी हैं।
३० जनवरी १९४८ को तुमने,
हे राम बोलकर शहादत पायी।
वो ही हमारे साबरमती के संत,
मोहनदास कर्मचंद गांधी हैं ।।
मन्नू जाति धर्म का भेद मिटाया,
मानवता का हमें पाठ पढाया।
कभी रक्त बहे ना मानवता का,
हमको अहिंसा का संदेश सुनाया।।
सदियों पहले एक इंसान हुआ था,
वो नित अर्धनग्न सा रहता था।
खादी को वो धारण करता था,
गौरों का मद मर्दन करने को,
डगर डगर वो पैदल चलता था।।
उसने गौरों को देश से बाहर किया,
उनका राज सिंहासन हिला दिया।।
जब आज किसी से बात सुनी यह,
बस असंभव सा ही मान लिया।
भला बिन हथियारों के जंग जीती हो,
तिरंगे के नीचे सबको खड़ा किया।।
यूएनओ ने नतमस्तक होकर मान दिया,
उन्हें अहिंसा दिवस का सम्मान दिया।
हमको सत्य का मार्ग दिखा दिया,
आज भारत का गौरव बढा दिया।।
हे २०वीं सदी के भीष्म पितामह,
आज भी तेरी करते जय जयकार है।
भारत विश्व का यूं कर्णधार बना,
हे बापू, सब तेरा ही उपकार है।।
हिंसा के पथ पर बढने वाले,
जग के नायक हो नही सकते।
हे मन्नू साहस बढाकर आगे बढो,
वीटो पावर यूं वापिस लो उनसे,
तुम इस जग के कर्णधार बनो।।
हृदय में पीड़ा बस एक ही है,
आज १४० करोड़ भारतीयों का,
हम यूं तो ना कभी अपमान सहे।
हम यूएनओ से अब नाता तोडे़ ,
या वीटो पावर का हम उपाय करें।।
हे युगपुरूष आज करते हृदय से याद तुम्हें,
हे शांति के महानायक शत शत नमन तुझे।
हे सत्य एवं अहिंसा के पुरोधा राष्ट्रपिता,
हम करते सादर कोटि कोटि प्रणाम तुम्हें।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।











