
सफ़र अल्फ़ाज़ों का बयां कर रही हूँ।
शब्दों के भावों के चाव ले रही हूँ।।
यात्रा करते समय आनंद उठाया कीजिए।
हँसते-मुस्कुराते हुए ही आगे बढ़ा कीजिए।।
अपने संग अन्य को भी लेकर चला कीजिए।
जलने-जलाने के ज़माने में मत जला कीजिए।।
राह में बढ़ते समय हो चाहे जीत या हार।
कभी नहीं करेंगे हम शब्दों के प्रहार।।
समाज में रखेंगे केवल नेक विचार।
सद्भावना संग रखेंगे बस सद्व्यवहार।।
स्नेह से भरी बातचीत हित करती है।
चित्त से केवल सबको प्रेरित करती है।।
पीड़ा पहुँचाने वालों को व्यथित करती है।
परोपकारी जन को उत्साहित करती है।।
शब्दों के घाव कभी भरे नहीं जाते।
कुविचार वाले केवल समय गँवाते।।
दया दृष्टि रखने वाले सबके काम आते।
भले इंसान जगत् में कभी नहीं भूले जाते।।
अंत में सफ़र अल्फ़ाज़ों का सोच-समझ कर कीजिए।
स्नेह भरे संवाद रखें मत आप विवाद किया कीजिए।।
शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)











