
श्री गुरु हर राय साहिब जी की विशेषताएँ बतलाती हूँ।
दयावान, ज्ञानवान, महान् संतान से मिलवाती हूँ।।
गुरु हर राय साहिब जी अत्यंत दयालु थे।
पक्षियों के प्रति भी गहरी करुणा रखते थे।
प्रकृति से स्नेह करते हुए सहानुभूति रखते थे।
पर्यावरण प्रेमी बस स्नेह रूपी सागर बनते थे।।
किरतपुर साहिब में औषधीय वनस्पति उद्यान स्थापित किया।
उन्होंने बाग-बगीचों और औषधीय पौधों का संरक्षण किया।।
रोगियों की सेवा हेतु जड़ी-बूटियों से सबका उपचार किया।
सत्कर्मों और सद्विचारों के साथ ही निज जीवनयापन किया।।
सेवा को ही सिख जीवन का आधार बताया।
मानव धर्म निभाते हुए ही अपना समय लगाया।।
अहिंसा और शांति के समर्थक ने सत्य पाठ पढ़ाया।
बेसहारा और असहाय लोगों को सदैव गले लगाया।।
सिख संगठनों (मिसलों) को सुदृढ़ करने में समय बिताते थे।
अनुशासन-मर्यादा में रहकर बहुमूल्य योगदान करते जाते थे।।
संघर्ष के साथ भी संवादों में मधुर व्यवहार रखा करते थे।
सरल जीवन व्यतीत कर केवल उच्च विचार रखा करते थे।।
श्री गुरु हर राय साहिब जी का जीवन हमें दया, सेवा, प्रकृति-संरक्षण और शांति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
सदैव संतों की वाणी में समय बिताने वाली अनुयायी-
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)











