भगवान श्री हरि नारायण विष्णु के विविध अवतारों को समर्पित रही २३४वीं कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि संस्था के तत्वावधान में आयोजित कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी का क्रमांक–२३४ विषय “माघ पूर्णिमा एवं भगवान श्री हरि नारायण विष्णु के अवतार” पर अत्यंत श्रद्धामय, साहित्यिक एवं भावप्रवण वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह आयोजन भक्ति, राष्ट्रभाव और साहित्यिक चेतना का अनुपम संगम सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ रचनाकार विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरुवंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार ज्योति प्यासी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’ की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।
काव्यगोष्ठी में पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, बिनोद कुमार पांडे, सुनील कुमार खुराना, नैन्सी श्रीवास्तव, आनंदी नौटियाल ‘अमृता’, नन्द किशोर बहुखंडी, डॉ. अंजू सेमवाल, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, भास्कर सिंह माणिक, विजय रघुनाथराव डांगे, अमित पण्डा अमिट रोशनाई, ज्योति प्यासी, दीदी राधा श्री शर्मा तथा पवनेश मिश्र आदि ने विषयानुरूप भावपूर्ण एवं चिंतनशील रचनाओं का सस्वर पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर किया।
मंच संचालन का दायित्व पवनेश मिश्र ने अत्यंत सुसंयम, सौहार्द एवं साहित्यिक गरिमा के साथ निभाया। विश्राम के पूर्व वन्दे मातरम् के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष के अवसर पर सामूहिक राष्ट्रगीत गायन किया गया, जिसने समस्त सहभागियों को राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत कर दिया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में कल्पकथा साहित्य संस्था की संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने सभी रचनाकारों, अतिथियों एवं श्रोताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की मंगलकामना के साथ कार्यक्रम को विश्राम प्रदान किया गया।











