
संडे को केन्द्रीय बजट जारी हुआ,
रविवार को शेयर औंधे मुँह गिर गया।
ना उम्मीदोंं का मार्ग दिखाई दिया,
संडे को शेयर मार्केट में अंधेरा छा गया।।
केन्द्रीय बजट में पोलमपोल हैं,
ना बढ़ती मंहगाई पर रोक हैं।
मंझले उद्योगों पर भी ना बात है,
देश का बजट बड़ा ही कमाल है।।
सेमी कंडेक्टर पर कुछ ध्यान हैं,
सात रेल कोरिडोर पर मंथन हैं।
खनिजों पर उनकी तिरछी नज़र हैं,
उनके व्यापार लाभ के ही संकेत हैं।।
जिनको इस बढ़ती मंहगाई ने मारा हैं,
उन गरीबों को ना आर्थिक सहारा हैं।
यह निजी शिक्षा को देता बढ़ावा हैं,
उनके शिक्षा से वंचित होने का अंदेशा हैं।।
एक मज़दूर भी देता टैक्स हैं,
बजट से उसे क्या राहत हैं।
टैक्स स्लेब में सुधार करते,
न्यूनतम टैक्स दायरा बढाते।।
चमड़े उत्पाद जरूर सस्ते हुए हैं,
हम सौर ऊर्जा की ओर आगे बढे हैं।
कैंसर दवाएं भी कुछ सस्ती हुई हैं,
चिकित्सा सेवा में राहत मिली है।।
ना रोजगार सृजन की बात है,
बेचारे बेरोजगार हुए बेहाल है।
स्कील डवलपमेंट छलावा हैं,
पहले से ही इसमे घोटाला है।।
भारत ईयू व्यापार की चर्चा है,
ना बजट में इसकी व्याख्या है।
पर्यटन का भी हुआ बुरा हाल है,
गिगवर्क्स पर ना कोई बात है।।
प्रदुषण से लोग बेहाल हुए हैं,
ना राहत का कोई रोडमैप हैं ।
स्मार्ट सिटी पहले से गायब है,
सामाजिक न्याय पर यह शांत है।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।











