
चले हो छोड़कर गलियाँ, पुरानी याद ले जाना,
दुआएं हम गुरुओं की तुम, अपने साथ ले जाना।
तुम्हारे शोर से रोशन, ये आंगन मुस्कुराता था,
सदा तुम खुश रहो प्यारे, यही सौगात ले जाना।
वो अठखेलियां सबकी, वो हँसना और रुला देना,
कभी जो डांट दी हमने, उसे दिल से भुला देना।
नया सूरज उगेगा कल, सुनहरी राह होगी अब,
सफलता के नए ऊँचे, कई परचम सजा देना।
हमें जितना सताया है, अब ऐसा काम न करना,
हमारे बाग को तुम सब, कहीं बदनाम ना करना।
जहाँ भी जाओ तुम बच्चों, रोशन नाम कर देना,
गर्व से हम उछल जाएं ,कुछ ऐसा काम कर देना।
चले हो छोड़कर गलियाँ, पुरानी याद ले जाना,
दुआएं हम गुरुओं की तुम, अपने साथ ले जाना।
रीना पटले, शिक्षिका
जिला- सिवनी, मध्यप्रदेश











