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बहन कंचनबाई को नमन।।

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में,
रानपुर गाँव के आंगनबाडी़ में।
एक घटना बहुत विकराल हुई,
मधुमक्खियाँ हमले को उद्यत हुई।।

मन्नू अचानक यह हमला हुआ,
बचने का ना कोई साधन मिला।
बीस बच्चों पर जीवन संकट आया,
कंचनबाई मेघवाल ने साहस दिखाया।।

वो तनिक भी ना घबरायी,
ममता उसकी जाग आयी।
अपने बच्चों को बचाने आगे आई,
पन्नाधाय बनकर वो खड़ी हो गयी।।

माँ की ममता को बच्चो ने पुकारा,
प्यारी माँ बस आप ही हैं सहारा।
तेरे सिवाय ना किसी के मुरीद है,
मेरी माँ आप ही आखरी उम्मीद है।।

माँ की छाती में दुध भर आया,
बच्चों को उसने सीने से लगाया।
ममता के आंचल में पनाह दिया,
अपना हाथ शीष पर यूं धर दिया।।

इधर उधर उसने नजरे दौडा़ई,
प्लास्टिक चद्दर वो लेकर आई।
उसने बच्चों के ऊपर यह औढाई,
वो मधुमक्खियों के डंक सहती रही।।

खुद की उसने परवाह नहीं की,
माँ की ममता की लाज बचायी।
तड़प तड़प कर कुर्बानी दे गयी,
बच्चों पर जरा सी आँच ना आयी।।

हमारी बहन कंचनबाई मेघवाल,
तूं मासुमियत की सच्ची मायी है।
धन्य तेरा त्याग एवं बलिदान हैं।
मन्नू तेरे चरणों में करता प्रणाम हैं।।


मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।

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