
नयी सी हवा है नया आसमां संग रहते हैं पिताजी व माँ।
खूबसूरती बिखरेते हुए महक रहा है आखिर गुलिस्ताँ।।
नई उमंग लिए हर दिन बहुत मुसकुराता है।
हँसता हुआ चेहरा आखिर सबके मन भाता है।।
इस ज़माने में हर कोई अत्यधिक इतराता है।
सीधे-सादे को चालाक बहुत अधिक बहकाता है।।
अपने नए पन का अहसास किया कीजिए।
मेहनती बन कर ही खूब काम किया कीजिए।।
बेशुमार दुआएँ लिया और दिया कीजिए।
आशीर्वाद लेते हुए ही आगे बढ़ लिया कीजिए।।
समय की रफ़्तार संग नवीन उमंग भर लीजिए।
अनमोल काल है प्रत्येक पल खुश रहा कीजिए।।
सुख सभी संग बाँटो किंतु दुख खुद सहा कीजिए।
कोई कुछ कहे परंतु किसी को कुछ मत कहा कीजिए।।
नयी सी हवा में प्रेरणा और प्रसन्नता दिखाई देती है।
प्रेम भरे विश्व में प्रयत्नशील रहने वाली लहर होती है।।
कटु आलोचना करने वालों के भीतर जहर दिखाई देते हैं।
वसुधैव कुटुंबकम के अंतर्मन में ही मधुर संबंध दिखाई देते हैं।।
अंत में नयी सी हवा है नया आसमां पर घबराना नहीं।
शेष बचे हुए जीवन में सेवा-भाव के ही स्वभाव हैं सही।।
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)











