Uncategorized

सत्य की कहानी

मेरी दादी और नानी ,
नित्य निज जुबानी ।
एक राजा एक रानी ,
रोचक करुण कहानी ।।
सत्य होता बड़ी कटु ,
जैसे सब रटा हो पटु ।
सत्य सदा ही स्वतंत्र ,
नहीं किसी पर लट्टू ।।
कभी राजा हरिश्चंद्र ,
कभी शिवि कहानी ।
रामपत्नी जनकनंदिनी ,
बन न पायी थी रानी ।।
कभी कहानी कर्ण की ,
दयावान औ था दानी ।
संगी मित्र था दुर्योधन ,
करता था जो मनमानी ।।
किंतु कृष्ण सत्य पक्ष ,
पाण्डव के थे परित्राणी ।
जिनके हैं पराया नहीं ,
सबके थे स्वयं कल्याणी ।।

अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *