
वास्ते राह के मंद हैं इन दिनों।
सिलसिले प्यार के बंद हैं इन दिनों।
जो जिए रोज ख़ुद में ख़ुशी और की,
लोग ऐसे यहां चंद हैं इन दिनों।
अब सुख़नवर उन्हें किस तरीक़े पढ़ें,
गफलतों में लिखे छंद हैं इन दिनों।
जो निभाते रहे , कायदे आज तक,
वो गले में पड़े फंद हैं इन दिनों।
मौन होंठों पर ठहरा- छुपा हाल है,
और भीतर कई द्वंद हैं इन दिनों।
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र











