
21 फरवरी शनिवार को शुभ घड़ी आई है।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की बधाई है।।
भाषाई और सांस्कृतिक विविधता भारत देश में छाई है।
बहुसंस्कृतिवाद के जश्न मनाने की घड़ी देखो आई है।।
प्रेम और प्रेरणा के प्रयासों की कला सब ओर छाई है।
भाषाओं को संरक्षित करने की जागरूकता हमने पाई है।।
शांति और स्नेह भरे संवादों से समाप्त होते विवाद हैं।
स्वदेश से लेकर विदेश तक केवल मधुरता भरे स्वाद हैं।।
प्राचीन संस्कृति की समाई नवीन पीढ़ी में वही खाद है।
सकारात्मकता की हमेशा बढ़नी चाहिए तादाद है।।
सांस्कृतिक विरासत का प्रसार प्रति दिन हमको करना है।
भाषा के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान-सम्मान भी करना है।।
कठिन परिश्रम करते हुए निडरतापूर्वक आगे बढ़ना है।
बेवजह या बेफ़िज़ूल की वार्तालाप में नहीं पड़ना है।।
किसी भी बालक के विकास में मातृभाषा सहायक है।
निज संस्कृति के गीत गाने वाला ही सच्चा गायक है।।
व्यक्ति के अस्तित्व का भाषा ही सबसे बड़ा परिचायक है।
विधि अनुसार कार्य करने वाला असली विधायक है।।
यूनेस्को (UNESCO) ने 1999 में 21 फरवरी को चुना।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में सुंदरता से बुना।।
हम भारतीयों ने निज क्षमता को बढ़ा दिया तब कईं गुणा।
अंतर्मन की आवाज़ को सज्जन ने नम्रतापूर्वक ही सुना।।
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)











