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समय का तकाजा

समय गर खराब हो भगवान भी धोखा देता है
अपने तो अपने खुद का साया भी साथ कहाँ देता है

तकदीर के मारों की तीनों जहान मे कोई सुनवाई नही है
कोई जज कोई अदालत हो कहीं कोई कार्यवाही नहीं है

समय का तकाजा है शान्ति से बैठना ही एकलौता उपचार है
रास्ते पर बजाय बढ़ने विश्रांत चित्त समय बीतना ही उचित इंतजार है

समय से लड़ना ही जीवन की एकमात्र मजबूरी है
अच्छा हो या बुरा कर्म ही इस परिधि की धुरी है

आज इस संसार मे जर जोरू जमीन की ही लडाई है
जमीर के वास्ते जीने वालों की कहाँ कोई सुनवाई है

ठाना है हमने जीना जब तक जीना है
अहसान किसी का कभी गलती से नहीं लेना है

जेब की फजीहत हो जाये जमीर सलामत चाहिये
मर जाये तो मर जाये हिकारत नही किसी की चाहिये

जिल्लत और हिकारत ही फूटी तदबीर के अमिट दाग है
अहसानों तले जलने के बजाये मंजूर पापी पेट की आग है


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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