
महादेवी वर्मा जी को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ।
आधुनिक युग की मीरा को शत्-शत् नमन् करती हूँ।।
होली के दिन 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश में जन्मी थीं।
हमारे समाज की भलाई करने वाली नेक व ईमानदार थीं।।
ऐसी महान् विदुषी की लेखनी सच में बड़ी ही चमत्कार थीं।
प्रख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा जी गद्यकार और पद्यकार थीं।।
छायावादी कवयित्री महादेवी जी में करुणा भरी थीं।
वेदना को महसूस करने की क्षमता अद्भुत भरी थीं।।
नारी संवेदना और सशक्तिकरण की मिसाल भरी थीं।
संवेदनशील, सहानुभूति और मर्मस्पर्शी भाव से भरी थीं।।
महादेवी प्रकृति का सजीव चित्रण बखूबी किया करती थीं।
नीलकंठ और गिल्लू जैसी रचनाएँ कमाल किया करती थीं।।
दीपशिखा तथा संध्या गीत भावनाओं को पिरो दिया करती थीं।
स्मृति की रेखाएँ व पथ के साथी में स्नेह भर दिया करती थीं।।
शिक्षाविद् महादेवी वर्मा जी कवयित्री व महान् लेखिका थीं।
पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम-भाव रखने वाली करुणामयी थीं।।
आत्मा, ईश्वर व जीवन के गहरे प्रश्नों को बखूबी समझाती थीं।
सरल, कोमल और भावपूर्ण शब्दों का सुंदर चित्रण करती थीं।।
चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए सबका सहयोग करती थीं।
एकाकी बन कर चलने वाली महादेवी नहीं किसी से डरती थीं।।
राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी जी के दिखाए पथ पर आगे बढ़ती थीं।
देश की रक्षा हेतु स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी किया करती थीं।।
अंत में दुर्गा अष्टमी के सुअवसर पर आए शुभ दिवस की बधाई।
आज विशिष्ट कवयित्री महादेवी वर्मा जी की स्मृति पुनः आई।।
प्रत्येक पल महान् साहित्यकारों को हार्दिक नमन् करने वाली-शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका-डॉ.
ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)













