
नव दीप जले, नव आशा जागे
माँ दुर्गा का पावन त्योहार
भक्ति की गूंज हर दिल में,
भर दे खुशियों का अपार संसार।
ढोल बजे और गरबा गूंजे
जगमग करती हर एक रात
माँ की शक्ति , माँ का आशीष दे जीवन में नई सौगात।
नव रूपों में माँ विराजे
हर कष्ट को दूर भगाए
सच्चे मन से जो पुकारे
माँ उसकी झोली भर जाए ।
लाल चुनर ओढ़े मैया
बैठी सिंह सवार
लंगूर नाचे आगे -आगे
भक्त करे सत्कार।
फूलों की वर्षा हो रही
भक्ति का है संसार
माता के दर पर जो आए
हो जाए उनका उद्धार।
जय माता दी की गूंज उठे
घर- घर हो आनंद अपार
नवरात्रि का पावन पर्व
लाए सुख, शांति और प्यार।
सिंह सवारी शेरों वाली
ममता की तू है रखवाली
तेरी महिमा गाए ये जग
तू है सबसे निराली।
तेरे चरणों में है सारा जहां
तू ही है सबकी पहचान
तेरी भक्ति में जो खोए
उसका हो जाए कल्याण।
जब- जब संकट हम पर आया
माँ ने आकर हाथ बढ़ाया
अंधियारे में बनकर रोशनी जीवन को सुंदर बनाया।
जय माँ भवानी
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़













