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जबलपुर की महारानी पड़ाव की माँ काली
विधा- काव्य स्तुति
है जगतारिणि है मुंडमाला धारिणी
त्रिपुरारी युगान्तकारी
है कल्यानवाहिणी मातारानी माँ कालरात्री
नमन तेरे पावन चरणों मे
रौद्रारूपधारी
रक्तरंजित जिव्हा तेरी नयनो से प्रसारती भीषण अंगारी
दुष्टों की संहारी
माँ करती कल्याण तू सन्तान तेरी दुनियाँ सारी दुखहारिणि भवतारिणि करुणा की मूरत
माँ जग की जननी तू पालनहारिणि
नर्मदातीरे जाबालिपुरम तुमरा धाम
जाबालिपुरम की महारानी कहात चरणों मे मेरा कोटि कोटि प्रणाम
तुमको मेरा बारम्बार प्राणाम है माँ काली जय अम्बेवाली लाटावालि पहाड़ावाली
जय अम्बे जय जय महारानी
जय माता काली जय माता रानी,
माँ काली की स्वरचित स्तुति
संदीप सक्सेना
जबलपुर










