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भारत


जो र त रहता ज्ञानपूं ज। से,,
जहां न कभी तिमिर टिक पाता ।
जहां हर राम कृष्ण सम रहते,
जो निश्चल प्रेम सौहार्द बांटकर,,,
जीवन सफल बनाते हैं।।
वह हैभारत देश हमारा,
जहां सभी मिलजुल कर रहते,,।1

जहां कटुता नहीं ,स्नेह बांटते,,

आशीषो की बोछारों से,
शिशुपलते प्यार की मीठी बगिया में,,,।

माताएं संस्कारों से जिन्हें सींचती,
जहां शांति ,नीति और भक्ति, पढ़ाई जाती ,,,
जहां शील ,गुण,धर्म ,रीति
बखानी जाती,,
यह है ,भारत देश हमारा,
जहां सभी मिलजुल कर रहते,,,।।2

जहां नर से नारायण बनकर,,
जीवन सफल बनाते हैं ।
जहां की नारी पुण्य प्रसूता,
दिव्य रूप देवांगना है,,
यह है भारत देश हमारा,
जहां सभी मिल जुल कर रहते,।।3

जहां ज्ञानरत ऋषि मुनि नित रहते,
धर्म मय जीवन की कर जो,
मोक्ष गति पाए जाते हैं।
जहां राष्ट्र धर्म बसता प्राणों में,,
जो निज धर्म से अधिक होता,,।।
यहां है भारत देश हमारा जहां सभी मिलजुल कर रहते,,,4
यह है स्नेह पुंज इस धरती का,,,
यहां राम ,कृष्ण ,गौतम नित जन्मे,,
मानवता का पाठ पढ़ाकर,
पूर्ण कर्म से सी च धरा को,
इसको पावन स्वर्ग बनाया,,।
यह रहे भारत देश हमारा जहां सभी मिलजुल कर रहते,,,5
यहां देवगन आने को नित आतुर रहते,
इस दिव्य धारा को पावन करते,,।
यश देखकर इस मातृभूमि को,,
नीज जीवन सफल बनाते हैं,,।।
यह है भारत देश हमारा यहां सभी मिलजुल कर रहते,,6

राजेंद्र कुमार तिवारी
मंदसौर, मध्य प्रदेश

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