
सरयू के तीरे धाम है
अयोध्या जिसका पावन नाम है
जग खैवनहार जग्दृष्टा उदगम जिनका प्रभु श्री राम है
मर्यादा शील सौम्यता के संगम है
दयानिधान करुनानिधान है दिगम्बर करते सर्वत्र ही जग कल्याण
रघुकूल के मान दशरथनंदन तारो दर्शन ही चारों तीरथ पुण्य समान
श्रीराम सन्तन पर सदा सहाई
नीरजते प्रभु सर्वत्र तरुणाई
शील के सागर सीतत्व स्वामी दास हनुमान
नमन आपको कोटि कोटि
जो विराजे अयोध्या धाम
चऊं ओर जयकारा है
जय जय श्रीराम जय जय श्रीराम
रावण वध लंका जयाधीश प्रभु श्री राम
आपको मेरा बारम्बार प्रणाम।
जय जय श्रीराम ।
स्वरचित एवं मौलिक
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र










