
शायरी
कुछ इस तरह से हम ये दुनियाँ समझे,
समझा खुदी को और पूरा जहां समझें।
समझाने वाले समझ गए इशारों मे,
जो न समझे,लाखों मे भी ना समझें।
ना दोस्ती किसी की,ना की दुश्मनी ही,
सब अपनी तरफ से ना,कभी हाँ समझें।
एकपल में लगा यूँ, समझ लिया सब कुछ,
और आगे अगले पल लगा,अभी कहां समझें।
मजाल अपनी खुशी अपने हाथों मे ,
खुदी से पा कर दाद जहाँपना समझें।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र













