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परिवार

परिवार जीवन रूपी नाव की पतवार है
जीवन जीने का सुन्दर सरल आधार है

परिवार से रिश्तों की अहमियत होती है
इंसानी रवायतों की सौम्य नेमत होती है

परिवार मे दर्द और गम साझा होते है
परिवार ही इन इंसानीं विपत्तियों से लड़ने का हौन्सला होते है

परिवार इन्सानी परवरिश का आधार होते है
सदाचार और नैकियत का उदगम परिवार होते है

भौतिकता की आंधी मे पारिवारिक संस्कृति का हास हो रहा है
रिश्ते नातों का सर्वथा चऊँ ओर अब नाश हो रहा है

पीढ़ी आज की संयुक्त परिवार की मोहताज हो गयी
चाचा ताऊ दादा दादी की समझ दिल से उनके आउट हो गयी।

कलयुग को बदलना है तो पुराने मे वापस लौटना होगा
माँ बाप समेत सारे रिश्तों को अब समेटना होगा।


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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