
नारी का सम्मान जहाँ ,वहीं देवता रहते।
सुख, शान्ति, समृद्धि वहीँ, आर्य ग्रन्थ हैं कहते।।
पिता से बडा़ हजार गुना, माता का स्थान।
वेद-व्यास जी कह गए, जानत सकल जहान।।
धन की देवी श्री लक्ष्मी जी,
विद्या की माँ शारद।
नवरात्रि में शक्ति साधना, करते सभी विशारद।।
गौ, गायत्री एवं तुलसी, गंगा, भारत माता।
इनकी पूजा हो रही, सुमिरन से दुख जाता।।
नारी है श्रद्धा की देवी, विज्ञापन की धार नही।
जड़ता है पाश्चात्य में,इसमें कुछ भी सार नहीं।।
पहनावा शालीन ह़़ो,उत्तम हो सब काम।
अपना गौरव जानिए, कहते कवि बलराम।।
बलराम प्रसाद द्विवेदी
राष्ट्रीय प्रचार सचिव(भारत)
विश्व सम्भ्रान्त समाज













