
विषय- नन्हे बच्चों की पुकार
दामिनी का कहर ऐसा, माँ को हमसे छीन गया,
नन्हे बच्चों का हर सपना, पल भर में ही बिखर गया।
माँ, तुझ बिन ये सूना आँगन, सूनी हर किलकारी है,
तेरे बिना इस दुनिया में, हर खुशियाँ भी भारी हैं।
नन्हे हाथ आज भी तुझको ढूँढ़ रहे हैं बाहों में,
तेरी आवाज़ सुनने को बैठे बच्चे तेरे राहों में।
“माँ, एक बार पुकारो हमको” दिल हर पल ये कहता है,
तेरी यादों का दीपक ही अब जीवन में रहता है।
दामिनी का कहर ऐसा, माँ को हमसे छीन गया,
नन्हे बच्चों का हर सपना, पल भर में ही बिखर गया।
कौन सुनाए लोरी अब, कौन माथा सहलाएगा,
गिर पड़ने पर प्यार से फिर कौन हमें उठाएगा।
तेरी ममता की खुशबू अब साँसों में बसती है,
हर धड़कन बस तेरी यादों से बातें करती है।
हे प्रभु, इतनी दया करना, उन बच्चों का मान रखना,
माँ की हर अधूरी ममता, अपने आँचल में भर रखना।
दामिनी ने माँ को छीना, पर प्यार नहीं मिट पाएगा,
माँ का पावन नाम सदा हर दिल में मुस्काएगा।
प्रभा तुम अब हमारे बीच नहीं हो 😭😭 हे ईश्वर इस पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान देना 🙏🙏
लेखिका
रीना पटले शिक्षिका
जिला-सिवनी मध्यप्रदेश













