
आओ हमसब मिलकर आज,
विश्व पुस्तक दिवस मनाते है।
इस गुरू ज्ञान के सागर को,
हम बार बार नमन करते हैं।।
यह पुस्तके अज्ञान को दुर करती,
नूतन राह हमको दिखलाती है।
सदैव ज्ञान हमको प्रदान करके,
निरंतर ज्ञान की बातें सिखाती हैं।।
ऐतिहासिक गाथा कहकर,
हमें नव संकल्प दिलाती हैं।
हम मंंजिल की ओर आगे बढे,
नये नये मार्ग हमें बतलाती हैं।।
सच्चा साथी हमें इस जगत में,
सिवाय पुस्तक के ना मिलता है।
जो बिन स्वार्थ नित साथ निभाए,
वो हमारे दुःख मे दर्द यूं बंटाता है।।
जब भी कोई बाधा आ जाए,
हम पास इन्ही के यूंं जाते है।
हम यूं पाकर ज्ञान के मार्ग को,
मन्नू नित आगे कदम बढाते हैं।।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












