Uncategorized
Trending

ग्रीष्म ऋतु का आगमन

पेड़ों की छाया सहमी- सहमी,
पत्ते भी चुप थमे से आज।
नदियाँ सिकुड़ी प्यासा सावन,
मानो खो बैठा अपना साज।

धरा ने ओढ़ी धूप की चादर,
सूरज बरसाए अग्नि के तीर।
लू की लहरें गान सुनाती,
गरमी का फैला गहरा नीर।

पर इस तपन में छुपा संदेश
संघर्ष से ही खिलता जीवन।
आम की खुशबू,रस की मिठास,
भर देती मन में नव- सृजन।

छत पर रातें, तारे साथी,
ठंडी हवा दे जाती प्यार।
ग्रीष्म कहे – मत घबराना तुम,
मेरे बाद ही आए बहार।

अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *