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प्रसन्नतापूर्वक प्रगतिशील रहा कीजिए

प्रसन्नतापूर्वक प्रगतिशील रहा कीजिए।
कठिन परिश्रम की कहानी कहा कीजिए।।
संघर्ष जारी रखते हुए सबकुछ सहा कीजिए।
बस परिस्थितियों के अनुकूल ही रहा कीजिए।।

खुश रहकर किया गया काम सबको भाता है।
अहंकारी जन बेवज़ह ही बहुत अधिक इतराता है।।
समझदार, वफ़ादार, ईमानदार ही मन को लुभाता है।
खाली या व्यर्थ में बैठने वाला केवल शिकायतें लगाता है।।

प्रेम और प्रेरणा की खुराक हर दिन खाया कीजिए।
अपने साथ-साथ अन्य को भी अवश्य चखाया कीजिए।।
माह में एक बार बरसाने तथा वृंदावन भी जाया कीजिए।
हारे के एकमात्र सहारे के भरोसे फिर मुसकुराया कीजिए।।

आनंदमय वातावरण के ही निर्माण किया कीजिए।
प्रफुल्लित होकर ही प्रेरणा स्वयं ही बन जाया कीजिए।।
आस्तीन के साँपों से अपनेआप को बचाया कीजिए।
आस्तिक बनने की खूबसूरत कला से कल्याण कीजिए।।

खुश होकर काम करने वाले बड़े खुशनसीब होते हैं।
वे घोड़े बेच कर अधिक नहीं बिलकुल भी सोया करते हैं।।
निडरतापूर्वक प्रत्येक कार्य को करते हुए आगे बढ़ा करते हैं।
खुद के स्वाभिमान की नि:संकोच सुरक्षा किया करते हैं।।

प्रसन्नतापूर्वक प्रगतिशील रहने वाले काम अधिक करते हैं।
मेहनतकश ज़माने में संघर्षशील ही केवल रहा करते हैं।।
अंधकार में चमकने वाले जुगनू खुद ही बन जाया करते हैं।
बहुमूल्य समय को न गँवाते हुए केवल खिलखिलाया करते हैं।।

प्रसन्नतापूर्वक प्रत्येक पल सुकर्म करने में प्रयासरत-
शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका समाज सेविका-
डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)

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