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नारी की व्यथा

विषय- नारी सशक्तिकरण
विधा- कविता

मैं नारी हूँ ,
सबकी प्यारी हूँ,
ये दुनिया मैंने सवारी हूँ,
मैं जननी हूँ,
फिर क्यो दुखों की मारी हूँ ?

मैं संस्कारी हूँ,
मैं आज्ञाकारी हूँ,
फिर भी क्यो मेरे पैरों में बेड़ियां डाली हूँ ?

मैं नारी हूँ,
मैं प्यारी हूँ,
मैं दुर्गा हूँ,
मैं काली हूँ,
फिर भी मैं असुरों से क्यो हारी हूँ?

कैसी मेरी बेबसी ,
कैसी ये लाचारी है,
जिसे मैंने जन्म दिया,
वही मुझ पर क्यो भारी है?

मैं ममता की मूरत हूँ,
मैं ही संघर्ष की सुरत हूँ,
फिर भी मैं पुरुषों के बिन मैं क्यो अधूरी हूँ?

मैं नारी हूँ,
मैं सबकी प्यारी हूँ,
मैं ही खुसियों की क्यारी हूँ,
मैं कुटियों को भी महल बनती हूँ,
मुझ में वो कलाकारी है,
फिर भी मैं क्यो बेचारी हूँ?

मैं ही घर की दिया हूँ,
मैं ही फुलवारी हूँ,
मैं ही निर्मल काया हूँ,
मैं ही इस जगत की माया हूँ,
फिर भी मैंने अत्याचार ही क्यो पाया है?

रचनाकार- नंदकिशोर गौतम
(माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्यमिक विद्यालय बकोड़ी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी ( म. प्र.)

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