
जय घोष गीत।।
जय घोष हो तुम,
नारी जाति का,,।
होशं ख नाद तुम,
उस अबला का।।
हो वीरांगना तुम,
उस नारी जाति की,,
हो गौरव गाथा,,,
इस धरती की,, ,,,।।1
सच में हो सत,,,,
तुम स तियों का,।
हो त्याग समर्पण
हर उस नारी का,,,।।
हो स्वाभिमान तुम
इस भारत का,,,।
हो एहसास तुम
हर उस नारी का,,,।।2
क्या है शील गुण धर्म
सतवंति का,,,,।
तुम ही हो दर्श गुणवंति का
हो ललकार तुम,
रणचंडी की,, ।।
हो फुकार तुम
उसे नागिन की, ,, ।।3
क्या कहे, तुम्हें ,
हे महागौरी, ,,,,
तुम ही हो नारी धर्म
इस अवनी का,,,।
जब भी हो कोई मुश्किल
हो विश्वास तुम,
हर उस मानव का,,।।4
जय घोष हो तुम,
नारी जाति का ।
होशंक नाद तुम,,
उस अबला का,,,।।
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश












