Uncategorized
Trending

असम्भव को सम्भव बनाते हैं

प्रकृति के आगे है बेवश हर इंसान,
हैं इक समान सब उसकी पैनी नजर में,
वहाँ नहीं चलता बाइबल, वेद और कुरान,
उलझे पाखण्ड से, अब जाग जा इंसान।

लक्ष्य पाने के लिए पथिक परिश्रम कर,
पर जबरदस्ती नहीं, हौसला रख कर,
मत हार मुसाफ़िर गिरकर मंजिल पर,
जीत भी मिलेगी मंज़िल पर चलकर।

हम कितने भ्रमित रहते हैं कि ख़ुशियों
में ईश्वर का आभार करना भूल जाते हैं,
पर दुखों और मुसीबतों की घड़ियों
में उससे ही शिकायतें करते रहते हैं।

हमारी प्रार्थनायें एवं हमारे विश्वास
जीवन के जितने अदृश्य पहलू होते हैं,
ये उतने ही अधिक ताक़तवर होते हैं,
कि असम्भव को सम्भव बना देते हैं।

प्रार्थना और विश्वास से परिश्रम
करना स्वादिष्ट प्रतिफल देते हैं,
धैर्य, प्रवीणता, स्पष्ट ज्ञान के बल
पर जीवन के अनुभव जोड़ लेते हैं।

सारे सद्गुण श्रम की शक्ति पर चार
चाँद लगाने जैसे अति सुंदर होते हैं,
आदित्य व्यंजनों में सही मात्रा मिर्च,
मसाले व नमक स्वादिष्ट बनाते हैं।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *