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प्रेम और विश्वास है बेटा


बेटा प्रेम और विश्वास की, एक सूरत होता है।
बेटा जिम्मेदारी और संघर्ष की मूरत होता है।
वक़्त जाने कैसे बीतता है बेटा बड़ा हो जाता है।
पिता के कपड़े और जूते, पहन जब वो बाहर जाता है।
पिता के रूप को लेकर, मन ही मन मुस्कुराता है।
अब मैं हो गया हुँ बड़ा, ये बात माँ को बताता है।
आईने में वो खुद को देख थोड़ा शर्मा सा जाता है।
बेटा प्रेम और विश्वास की ,एक सूरत होता है।

वो अपने महँगे शौक जैसे, पीछे छोड़ आता है।
बहुत सी ख्वाहिशों को वो, दबाना सीख जाता है।
पिता का चेहरा देखकर अब वो,
बहुत कुछ जान जाता है।
माँ की हर ख्वाहिशों को वो,
अब अपनी मान लेता है।
कभी कभी उसका बचपन,
फिर से लौट आता है।
बेटा जिम्मेदारी और संघर्ष की,
एक मूरत होता है।
सुनी कहानी राजाओं की बेटा राजकुमार होता है।
आदर्शवादी बेटों का पिता स्वयं एक राजा होता है।
पिता के बाजुओं की ताकत अब बेटा बन जाता है।
बेटा सूरज भी होता है बेटा चंदा भी होता है।
हर एक बेटा अपने माता पिता की,
आँखों का तारा होता है।
बेटा प्रेम और विश्वास की सूरत होता है।

रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)

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