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अनुभव: एक कड़वी दवा

डॉक्टर दीपक गोस्वामी
मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक
समन्वयक।आदर्श संस्कार शाला,भारत
आप देश के चर्चित लेखक,सामजिक कार्यकर्ता, मोटिवेशनल स्पीकर ,ट्रेनर है

डिग्री एक कागज है। तुम्हारा गुरुकुल एक बिल्डिंग है। और तुम्हारा ज्ञान? वो किराए का मकान है। जब तक मकान मालिक यानी अनुभव नहीं आता, तब तक तुम सिर्फ किरायेदार हो।

तर्क नंबर 1: गुरुकुल थ्योरी बेचता है, जिंदगी प्रैक्टिकल लेती है
B-School में सिखाया: “Risk Management”।
बाजार ने सिखाया: 2020 में लॉकडाउन लगा, दुकान बंद, कर्ज चालू। अब बता, तेरी SWOT एनालिसिस कहाँ गई?

गुरुकुल कहता है: “Customer is King”।
अनुभव कहता है: “कस्टमर वही है जो उधार लेकर भाग जाए और कॉल भी ना उठाए”। ये चैप्टर किस किताब के पेज 287 पर है? नहीं है। क्योंकि जिंदगी की किताब में पेज नंबर नहीं होते, सिर्फ घाव होते हैं।

तर्क नंबर 2: आवश्यकता वो मास्टर है जो फीस नहीं लेता, वसूल लेता है
तुम AC क्लासरूम में बैठकर गरीबी पर निबंध लिख सकते हो। नंबर भी मिल जाएंगे।
पर जब 3 दिन रोटी ना मिले, तब जो आइडिया दिमाग में फूटता है, उसे “जुगाड़” नहीं “इनोवेशन” कहते हैं। वो इनोवेशन Harvard केस स्टडी में नहीं पढ़ाया जाता।

धीरूभाई को अंग्रेजी नहीं आती थी। पर पैसा कमाना आता था। IIM वाले केस स्टडी बनाते हैं, वो केस स्टडी बन गया। क्यों? क्योंकि उसकी आवश्यकता ने उसे मजबूर किया था कि डिग्री नहीं, डील पक्की करो।

तुम्हारी जरूरत अगर तुम्हें रात को सोने ना दे, तो समझो तुम्हारा पहला गुरु मिल गया। वरना तुम गुरुकुल के हॉस्टल में कंबल ओढ़कर प्लेसमेंट का सपना देख रहे हो।

तर्क नंबर 3: धैर्य रखना बेवकूफी है, जब तक मजबूरी ना हो
इंस्टाग्राम ने तुम्हें सिखाया: “30 दिन में बॉडी”, “7 दिन में करोड़पति”।
अनुभव का थप्पड़ कहता है: “बेटा, बांस 5 साल जमीन के अंदर सड़ता है, तब जाकर छठे साल आसमान छूता है”।

तुम चाहते हो पहली ही कोशिश में वाहवाही? तो सुन, एडिसन 10,000 बार फेल हुआ। अगर वो दूसरा फेलियर होने पर मोटिवेशनल रील देखकर रोने लगता, तो आज हम मोमबत्ती जला रहे होते।

धैर्य मतलब बर्दाश्त नहीं। धैर्य मतलब पीटे जाने के बाद भी रिंग में खड़े रहना। क्योंकि तुम जानते हो, एक मुक्का तुम्हारा भी लगेगा। गुरुकुल में बैक लगने पर सप्लीमेंट्री होती है। जिंदगी में बैक लगी तो पूरी जिंदगी सप्लीमेंट्री बन जाती है।

तर्क नंबर 4: संयम कमजोरों का हथियार नहीं, ताकतवरों का ब्रह्मास्त्र है
गुस्सा आना आसान है। फोन पटकना आसान है। इस्तीफा देना आसान है।
मुश्किल क्या है? जब क्लाइंट बेइज्जत करे तब भी “जी सर” बोलना। क्योंकि तुम्हें पता है महीने की 5 तारीख को EMI देनी है।

इसे गुलामी मत समझो। इसे स्ट्रैटेजी समझो। चाणक्य ने कहा था: “सांप को तब तक छेड़ो मत जब तक उसे कुचलने की ताकत ना हो”। गुरुकुल में चाणक्य नीति रटाई जाती है। अनुभव में चाणक्य नीति घटती है।

तुम्हारा संयम टूटा, तुम हारे। मार्केट को फर्क नहीं पड़ता तुम कितने सही थे। वो देखता है कौन बचा। सर्वाइवल का पहला नियम: जुबान पर ताला, दिमाग में तराजू।

तर्क नंबर 5: साहस का मतलब छाती ठोकना नहीं, फटे तक जूझना है
मोटिवेशनल स्पीकर स्टेज पर चिल्लाएगा: “डरो मत!”
अनुभव कान में बोलेगा: “डर, पर फिर भी कर”।

कल्पना चावला को पता था स्पेस मिशन में रिस्क है। फिर भी गई। उसे “साहसी” इसलिए नहीं कहते कि वो मरी। उसे साहसी इसलिए कहते हैं कि वो रिस्क कैलकुलेट करके गई।

तुम नौकरी छोड़कर स्टार्टअप का सोच रहे हो? बढ़िया। पर बीवी के गहने गिरवी रखकर, बच्चों की फीस तोड़कर, बाप की दवाई रोककर अगर कर रहे हो, तो वो साहस नहीं, बेवकूफी है। साहस का दूसरा नाम कैलकुलेटेड पागलपन है। गुरुकुल ये फॉर्मूला नहीं देगा।

अब सुनो 5 ‘अ’ का पोस्टमार्टम: क्योंकि मीठी बातें बहुत हो गईं

  1. अनुभव: ये सबसे महंगा टीचर है। पहले इम्तहान लेता है, फिर सबक सिखाता है। तुमसे पैसे, इज्जत, नींद, रिश्ते सब वसूल लेगा। बदले में जो देगा, वो कोई छीन नहीं सकता। इसलिए कड़वा है।
  2. अभ्यास: टैलेंट एक अफवाह है जिसे नाकाम लोग फैलाते हैं। सचिन अगर 4 बजे प्रैक्टिस ना करता, तो “भगवान” की जगह “एवरेज” कहलाता। तुम दिन में 8 घंटे रील स्क्रॉल करके 8 फिगर सैलरी चाहते हो? गुरुकुल भी हंसेगा तुम पर। अभ्यास वो कब्र है जिसमें तुम रोज अपने कंफर्ट को दफनाते हो।
  3. अनुबंध: खुद से किया वादा तोड़ना सबसे आसान है। कोई देखने वाला नहीं होता। इसीलिए 90% लोग वहीं रह जाते हैं जहाँ पैदा हुए थे। रोज 5 बजे उठूंगा, ये अनुबंध अगर तुम 7 दिन तोड़ दो, तो आईने में देखना। जो दिखेगा वो तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन है।
  4. अनुशासन: आजादी चाहिए? तो पहले गुलाम बनो अपने रूटीन के। फौज का जवान 4 बजे उठता है क्योंकि देश सो रहा होता है। तुम 10 बजे उठते हो क्योंकि नेटफ्लिक्स चालू था। अनुशासन बोझ नहीं, हथियार है। बिना इसके तुम्हारा टैलेंट लाइसेंसी बंदूक है जिसमें गोली नहीं।
  5. अनुष्ठान: काम को काम समझोगे तो थकोगे। काम को पूजा समझोगे तो थकान तुम्हारे पैर छुएगी। जापानी “शोकुनिन” होते हैं। एक ही काम को जिंदगी भर करते हैं। इसलिए उनकी चाकू 100 साल चलती है। तुम हर 6 महीने में जॉब बदलकर “एक्सपोजर” बता रहे हो। वो एक्सपोजर नहीं, भगोड़ापन है।

सबसे कड़वा तर्क: गुरुकुल तुम्हें नौकर बनाता है, अनुभव मालिक

डिग्री लेकर तुम लाइन में लगते हो: “सर, हायर कर लो”।
अनुभव लेकर तुम लाइन लगवाते हो: “इंटरव्यू के लिए आ जाओ”।

MBA ने तुम्हें सिखाया “How to run a business”।
किराने वाले ने सीखा “How to run a business even when customer gaali de”। कौन ज्यादा पास?

दुनिया रिज्यूमे नहीं देखती। दुनिया रिजल्ट देखती है। और रिजल्ट लैब में नहीं, मैदान में निकलता है। जहां घुटने छिलते हैं, पगड़ी उछलती है, तब जाकर अकड़ निकलती है और अक्ल आती है।

आखिरी घूंट: जहर का
अगर तुम अब भी सोचते हो कि कोई मेंटर, कोई कोर्स, कोई गुरुकुल तुम्हें असाधारण बना देगा, तो तुमसे बड़ा भोला कोई नहीं।

असाधारण लोग पैदा नहीं होते। वो घिसटते हैं। गिरते हैं। गाली खाते हैं। मुक्के खाते हैं। फिर एक दिन उठते हैं और दुनिया को घसीटते हैं।

तुम्हारा अनुभव ही तुम्हारा GPS है। बाकी सब गूगल मैप है, जो नेटवर्क गया तो बंद।

तो जाओ। ठोकर खाओ। फीस भरो। क्योंकि जो दर्द से नहीं सीखता, वो कर्ज से सीखता है। और जिंदगी का ब्याज बहुत महंगा है।

गुरुकुल ज्ञान देगा। अनुभव जान लेगा। फर्क समझो, वरना फर्क पड़ जाएगा।

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