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मातृ दिवस पर मेरी कविता

माँ तेरे आँचल का सहारा चाहिए।
आशीष भरे हाथों का आसरा चाहिए।

बिखरे हैं जो मेरी आँखों से मोती।
उन्हें समेटने को  तेरी ममता की छाँव चाहिए।

माँ तुम्हारे बिन यह संसार अधूरा सा लगता है।
तुम्हारे स्नेहमई क़दमों का सहारा चाहिए।

माँ तुम बिन मेरा अस्तित्व कुछ नही है ।
तुम्हारे साहस भरी बातों का सहारा चाहिए।

तुमसे जीवन में खुशियों की उजास है।
तुम बिन जीवन एक अंधियारी रात है।

मेरे जीवन में तुम्हारी रिक्तता का एहसास
मुझे जीवन भर की मायूसी दे जाता है।

तुम्हारी उपस्थिति जीवन में हमारी खुशियों का कारण बन जाती है।

ऐसा समय भी आएगा जब तुम न होंगी
यह सोच कर रातों में सिहर उठती हूँ।

बैठकर तुम्हारे सिरहाने माथे को
सहलाना चाहती  हूँ।
तुम हो मेरे पास तुम्हारा सानिध्य
महसूस करना चाहती हूँ।

     डॉ. सांत्वना मिश्रा
       नोएडा

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