
ग़म के गीत गाये जा, ग़म के गीत गाये जा।
हर कदम फूँक फूँक रख,
पग पग पै आँसू बहाय जा,
हर रोज़ जवाँ शहीद हो रहे,
सीमा पै गोलियाँ खाये जा।
गम के गीत गाये जा, गम के गीत गाये जा।
कोई किसी की नज़र में अच्छा या
बुरा होता है तो अच्छाई या बुराई
देखने वालों की नज़रों में होती है,
जो जैसा है नज़र वैसी ही होती है।
पत्थर और गोलियाँ खाये जा।
ग़म के गीत गाये जा, ग़म के गीत गाये जा।
बहादुरी के गीत जहाँ गाये जाते हों,
कदम कदम बढ़ाये जा, ख़ुशी के गीत गाये जा,
ये ज़िंदगी वतन की है, वतन पर लुटाये जा,
अब सच में जाँ लुटाये जा, सच में जाँ लुटाये जा।
और ग़म के गीत गाये जा, ग़म के गीत गाये जा।
जम्मू कश्मीर हो, सियाचिन लद्दाख हो,
दंतेवाडा छत्तीसगढ़ या उत्तर पूर्व की सीमा हो,
जवाँ शहीद हो रहे, बीबी बच्चे अनाथ हो रहे,
आदित्य सैनिक बना मरने के लिये,
अपनी जाँ लुटाये जा।
और ग़म के गीत गाये जा, ग़म के गीत गाये जा।
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ











