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तुम्हें प्यार बहुत है मुझसे,

तुम्हें प्यार बहुत है मुझसे, एक बात कहुँ मैं तुमसे।
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?
थक जाऊ गर किसी राह पर चलते चलते।
थक जाऊँ यदि किसी राह पर चलते चलते।
बन हवा का ठंडा झोंका,
तुम मुझको राहत दोगे।
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

माना कि आज तुम्हें, सुंदर मैं लगती हूँ।
माना कि आज तुम्हें, सुंदर मैं लगती हूँ।
जब ये सुंदरता ढलने लगे,
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

मेरी इन जुल्फों के साये, जो तुम्हें घटा से लगते हैं।
मेरी इन जुल्फों के साये, जो तुम्हें घटा से लगते हैं।
जब इनमें सफ़ेदी आने लगे,
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

मेरी इन आँखों में खोकर तुम, मुझको मृगनयनी कहते हो।
मेरी इन आँखों में खोकर तुम, मुझको मृगनयनी कहते हो।
जब सब कुछ धुंधला दिखने लगे,
सुनो ,क्या साथ मेरा तुम दोगे?

हाथों में हाथों को लेते ही, ये नाजुक और कोमल लगते हैं।
हाथों में हाथों को लेते ही, ये नाजुक और कोमल लगते हैं।
जब इनकी कोमलता खो जाए,
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

तुम मुझसे जब कहते हो, मेरे पैरों की सुंदरता से,
पायल भी सुंदर दिखती है।
तुम मुझसे जब कहते हो, मेरे पैरों की सुंदरता से,
पायल भी सुंदर दिखती है।
जब पैरों की मेरे खो जाये चमक,
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

जब तुम मुझसे कहते हो, चाल तुम्हारी है मतवाली,
तुम तो कयामत लगती हो।
जब तुम मुझसे कहते हो, चाल तुम्हारी है मतवाली,
तुम तो कयामत लगती हो।
चलते हुए जब लड़खडाऊं,,
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

हिम्मत मेरी जब लगे टूटने, और मैं थोड़ी सी थक जाऊँ।
हिम्मत मेरी जब लगे टूटने, और मैं थोड़ी सी थक जाऊँ।
क्या ऐसे ही काँधे का सहारा दोगे।
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

हाथों की तुम्हारे, लगती दाल बहुत ही अच्छी,,
आगे भी बनाकर दोगे।
हाथों की तुम्हारे, लगती दाल बहुत ही अच्छी,
आगे भी बनाकर दोगे।
पति पत्नी हैं माना हम दोनों,
क्या अब दोस्त बनकर भी रहोगे।
सुनो, क्या साथ मेरा तुम दोगे?

पति पत्नी, प्यार और दोस्ती,
सब तुमसे शुरू, तुम पे ही खत्म।
तुममे सब रिश्तों को देखूँ,
सुनो ,क्या साथ मेरा तुम दोगे?

रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)

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