
विवाह बंधन के प्रथम दिवस में,
पत्नी के संग थे एकांत वास मे,
भ्रमण को निकले थे, उपवन मे,
बसंती बयार लगी थी चलने ।
मन प्रफुल्लित था,हम दोनों मे,
सुख दुख की बातै, साझा किये हमने,
प्रेम भरी बातें से,मन लगे लुभावने,
अनायास ही,पत्नी के हाथ पकड़ लिया मैने ।
तन मन अब लगा था हमारे झिझोरने ,
लज्जा से वो लगी,सकुचाने
अनचाहे प्रयास किये,हाथ छुड़ाने उसने ।
मन तो ,उसे भी था मेरा हाथ थामने ।
स्त्री बोध के वश मे थी ,वो लज्जा में ,
तारे झिलमिलाने लगे थे, आकाशगंगा मे,
मौसम सुहानी किये थे बसंती बयार ने
सुध बुध खोने लगे थे हमदोनों प्यार में ।
ध्यान रहे ,पति पत्नी के रिश्ते मे
कोई भी बाते ना दबाये रखना मन मे,
जो भी हो,सारी बातें एक दुजे से है , कहने
हरेक बातों को समझने मे,रहेंगे साथ में ।
ऐसे ही कुछ वादे,कसमे खाये हमने ।
जिंदगी की शुरूआत हो,भरोसे मे
देर तक हाथ थाम रखे थे,एक दुजे ने
ताकि स्पर्श का सुकुन आते रहे,मन मे ।
चुन्नू साहा पाकूड़ झारखण्ड











