
शब्दों के जादूगर, भावों के ज्ञानी,
गुरुदेव तुम थे भारत की कहानी।
गीतों में गूँजी आत्मा की पुकार,
तुमसे ही सजा साहित्य का संसार।
शांति निकेतन का दिया तुमने ज्ञान,
हर हृदय में जगाया मानवता का मान।
“गीतांजलि” की मधुर वो धुन,
आज भी करती मन को स्पंदन।
नहीं थे केवल कवि तुम महान,
थे विचारों के उजले आसमान।
स्वतंत्रता, प्रेम और सत्य का मार्ग,
दिखाया तुमने हर जन को साफ़।
तुम्हारी लेखनी में था वो जादू,
जो मिटा दे हर अंधियारा, हर बाधा।
गुरुदेव, तुम हो अमर प्रेरणा,
भारत की सच्ची चेतना।
कृष्ण कान्त कपासिया











