
ऋतुओं ने पहनी है यादों की पायल,
चली जो हवा, दिल हुआ फिर से घायल।
न जाने ये कैसा नया रंग आया,
अंधेरा हटा और खुला आसमान है,
बदलते ये मौसम वफ़ा का बयाँ हैं।
जो पत्ते गिरे थे वो शिकवा नहीं थे,
नया रूप लेने का वादा किये थे।
ज़रा देखिए शाख पर कोंपलें हैं,
उदासी के साए में फिर से पले हैं।
हवाओं ने छूकर जगाया है मधुवन,
नई खुशबूओं से ये महका है उपवन,
ये मखमली धूप और कोहरे का साया,
प्रकृति ने कैसा ये जादू चलाया।
कहीं चटक रंग हैं, कहीं है शांत मंज़र,
हर एक मोड़ पर एक नई दास्तां है।
बदलना ही तो ज़िंदगी का मज़ा है।
सिखाती है ऋतुएँ ठहरना, संभलना,
समय के बहाव में हँसते हुए चलना,
कि हर एक मौसम खुदा का करम है।
चली जो हवा, दिल हुआ फिर से घायल,
ऋतुओं ने पहनी है यादों की पायल।
रीना पटले शिक्षिका
शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला सिवनी मध्यप्रदेश












