Vijay Kumar
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साहित्य
ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है
ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही हैक्या है जो बताना चाह रही हैतेरे आगोश मे ही मेरा वजूद हैफिर…
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साहित्य
आदमी मुर्दा बन चिता में जल रहा है
रचनाकार-सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर जीवन में जिसकी सांसे हो गई खत्म,आदमी मुर्दा बन चिता में जल रहा है। पास…
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साहित्य
मोमबत्ती
मोम से बनी मोमबत्ती हैयह नाजुक और कोमल हैइसे मंदिर ,घरों में जलाते हैंइससे मिली कांति निर्मला है। मोमबत्ती प्रकाश…
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साहित्य
शादी और उसका प्रभाव
हमारा समाज आज शादी की मांग में एक बाप के कर्ज से अपनी बेटी को सौंपता है, जहां समाज वालों…
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साहित्य
मन का आईना कोई काँच नहीं,
मन का आईना कोई काँच नहीं,ये तो भीगी हुई एक ख़ामोश झील है,जिसमें हर एहसास लहर बनकर उठता है,और हर…
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साहित्य
तूफानों से लड़ना सीखो
हे पथिक! तूफानों से लड़ना सीखोजान लो जिन्दगी एक संघर्ष हैहार और जीत इसके दो पहलू हैंजिसने तूफानों से लड़ना…
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साहित्य
प्रेम कोई शब्द नहीं, सांसों का तराना है
सच ,प्रेम कोई शब्द नहीं, सांसों का तराना हैप्रेम दिल की धड़कन है, जिंदगी का फसाना हैयह एक अनकहा जज्बा…
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साहित्य
तुम बनाए रखना
तेरे शिवाय कोई नहीं है अपना रे कन्हैयातुम बनाए रखना अपनी कृपा रे कन्हैयाबीबी बच्चे ये सब मतलब के है…
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साहित्य
समाज के सदा आभारी रहें
ज़िंदगी की ख्वाहिशें ज़िंदगीभर मनुष्य को भगाती रहती हैं,कुछ ख्वाहिशें ख़ुद की होती हैं,तो और कुछ जमाने की होती हैं।…
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साहित्य
सुंदरता सस्ती, चरित्र महँगा
सुन्दरता सस्ती है, चरित्र महँगा है,घड़ी सस्ती है, पर समय महँगा है,शरीर सस्ता है, जीवन महँगा है,रिश्ता सस्ता है, निभाना…
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