Vijay Kumar
-
साहित्य
अनकहा सिलसिला
चेहरे पर मुस्कान सजाकर,राज़ छुपाना पड़ता है,मन की बातें मन ही जाने,खुद को बहलाना पड़ता है। आईने से आँख मिलाकर,सच…
Read More » -
साहित्य
शब्दवीणा के तृतीय स्थापना दिवस पर भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित
औरंगाबाद। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ के तृतीय स्थापना दिवस के अवसर पर 30 मार्च को दानिका संगीत महाविद्यालय…
Read More » -
साहित्य
महावीर जयंती
न किसी को लड़ाओ ।न किसी को लड़ने दो।न खुद दुखी रहो ।न किसी को दुखी रहने दो।यही तो है…
Read More » -
साहित्य
हैरानी
कल की चिंता छोड़ मुसाफिरक्या तूने बनाया यहां ताना है ।सच्चा सुख तो पास में तेरेकल तो यहां से उड़…
Read More » -
साहित्य
जरुरी नही जो मुस्कुरा रहा हो वो खुश हो
जरुरी नहीं जो मुस्कुरा रहा हो वो खुश होजीवन से मुकम्मल वो संतृष्ट हो मुस्कुराहटों के भी रूप अनेक होते…
Read More » -
साहित्य
क्रुद्ध होती गर्जना
हर जगह आधी है छाईरात सी अब तो हो गई।छा गया अब तो अंधेराधूल कुछ ऐसी उड़ गई ।। गगन…
Read More » -
साहित्य
घड़ी
हर दिन विराम नहीं लेती हैनिरंतर ध्वनि से बजती रही हैदिन रात में कार्य करती हैसबकी उपयोग होती घड़ी हैघड़ी…
Read More » -
साहित्य
खेवनहार
इंसान अपनी जिंदगी भूल करसक्षम लोगों केमोह में फंसेदौड़ कर । अपनी जिंदगी केसुखों की बली देने लगेपरमात्मा भीउस मोह…
Read More » -
साहित्य
नामस्मरण
जय जिनेंद्र गाई येजय जिनेंद्र गाईये ।।2नाम जपते जाइएजय जिनेंद्र गाईये,,,2 नवकार मंत्र गाई येये महामंत्र गाईये,,जय जिनेंद्र गाईये,,,।।जय जिनेंद्र…
Read More » -
साहित्य
अरिहंत, नाम स्मरण।।
भजन कर ले तू अरिहंत का,,मोक्ष तेरा भी हो जाएगा। कहीं आए दुनिया में,,लेकर के नाम अरिहंत का2कर ले सत्कर्म…
Read More »









