Vijay Kumar
-
साहित्य
दिया के बाती
जलती है बाती, छोटी सी जान,अंधेरे से लड़े, बुझे ना सम्मान।तेल की बूंदें, उसकी सांसें गिनें,फिर भी वो हंसती, रोशनी…
Read More » -
साहित्य
धनतेरस
दियरी के परब बा निचकाईल ,मुॅंह से निकालीं निमन भाखा ।चल रहल बा सफाई सुथरा ,छुट रहल बाटे खूब पटाखा…
Read More » -
साहित्य
दीपावाली- पांच दिवसीय पर्व- काव्य
दीपावली का पर्व है खास ,सभी मनाते है इसे हर्षोल्लास ।। पांच दिवस इसमें होता है विशेष पूजन ।करते समस्त…
Read More » -
साहित्य
लक्ष्मी जी व गणेश जी का पूजन साथ क्यों होता हैं?
आईये जानें : दिवाली भगवान श्री राम के अयोध्या लौटने के शुभ अवसर के रुप में मनायी जाती है, हालाँकि…
Read More » -
साहित्य
धनतेरस
धनतेरस का शुभ दिन प्यारा,दीप जले आँगन-घर सारा।लक्ष्मी-माँ की कृपा सब पर,खिले जीवन में सुख अपार। कुबेर देव धन दें…
Read More » -
साहित्य
माटी के मया, संस्कृति के राग
छत्तीसगढ़ी में सांस्कृतिक सौंदर्य और प्रकृति के संगम पर आधारित है।। छत्तीसगढ़ मोर, माटी के सुगंध बासे,संस्कृति के रंग, हिरदे…
Read More » -
साहित्य
चलो गाओ री सखी
चलो गाओ री सखी,महादेवी की कहानी,फर्रुखाबाद में जन्मी,दुःखों की चिर-रागिनी। उन्नीस सौ सात का,वो शुभ दिन आया,हेमरानी और गोविंद ने,बेटिया…
Read More » -
साहित्य
अद्वितीय धनतेरस
यह धनतेरस अद्वितीय है,न सोना ,चाँदी लाना है,जीवन में जो असली ‘धन’ है,बस उसको ही पाना है। यह धनतेरस ‘स्व’…
Read More » -
साहित्य
युद्ध-सा चल रहा है मन में
युद्ध-सा चल रहा है मन में,जैसे आसमान बिखर रहा हो आसमान में।न जाने, मैं जीतूंगा या हारूंगा —ख़ुद से, हौसलों…
Read More » -
साहित्य
सबके अपने-अपने राम,
सरयू तट पर बसी अयोध्या किसी के बसते “राम” वहां।कोई दशरथ पुत्र है कहता,कृपालु भज मन कहे जहां। किसी के…
Read More »









