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  • प्रखर राष्ट्रवादी नेता वीर विनायक दामोदर सावरकर

    “काल स्वयं मुझसे डरा हैमैं काल से नहीं,काले पानी का कालकूट पीकरकाल से कराल स्तंभों को झकझोर करमैं बार-बार लौट…

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  • सोच के उन मासूमों का,

    सोच के उन मासूमों का, दिल विह्वल विह्वल हो जाता है,बेजुबानों को रंजित रक्त से कैसे कोई देख पाता है…

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  • रामावतार दरकार है

    आजकल गर्मियाँ बहुत बढ़ गई हैं,शरीर में हर जगह खाज हो रही है,इलाज डरमटोलोजिस्ट करता है,सियासी खाज लाइलाज होता है।…

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  • दहेज प्रथा

    मानव जीवन संघर्षमय बनता हैहर कुटुंब में दहेज एक समस्या  हैविवाह के समय धन दौलत देता हैइसे दहेज को लेना संप्रदाय…

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  • लौटा हूँ शमशान से

    अभी अभी लौटा हूँ मैं तो शमशान से,अछूता हो गया हूँ बिना स्नान के। अब तो लगे लगाकर रो रहा…

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  • अनकहा सिलसिला

    ​चेहरे पर मुस्कान सजाकर,राज़ छुपाना पड़ता है ।मन की बातें,मन ही जाने ।खुद को बहलाना पड़ता है। ​आईने से आँख…

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  • धोखा खा गये

    धोखा खा गये,खुद से हार गयेविश्वास जिसपर कियेवही,धोखा दे दिये,ऐसे भी लोग है,बदलतेयही तो,समझ न पायेसारी रहस्य,मेरे जिसे मालूम थावक्त…

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  • तानाशाही और कमजोर विपक्ष।।

    जब विपक्ष कमजोर होता है,सत्ता का यूं अंहकार बढता है।वो अपने ही मोह से चलता है,विपक्ष पर प्रत्यारोप लगाता है।।…

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  • “मै” जो टूट के भी खड़ा हूँ

    अगर मौका मिला कभी, तो कागज पर,अपनी थकान लिखूंगा।मजबूत कंधों के पीछे छुपा,वो छोटा सा इंसान लिखूंगा। वो जो हर…

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  • अनंत अतृप्त भूख*

    डाक्टर दीपक गोस्वामी मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक आप देश के चर्चित लेखक,मोटिवेशनल स्पीकर, ट्रेनर,सामजिक कार्यकर्ता है। आज की अत्याधुनिक भूख पेट…

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