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अंधी मोहब्बत की आँखे

मोहब्बत पहले अंधी हुआ करती थी,
फिर उसने अपना इलाज करवाया।
अब वो गाड़ी बंगला बैंक बैलेंस,
डेबिट कार्ड क्रेडिट कार्ड सब देख लेती है।

पहले दिल देखा करती थी,
अब सैलरी स्लिप मांग लेती है।
पहले खतों में इश्क ढूंढती थी,
अब प्रॉपर्टी के कागज तौलती है।

इश्क का चश्मा उतार फेंका उसने,
अब पैसों के लेंस लगा लिए हैं।
जिसे छूकर धड़कन बढ़ जाती थी,
अब उसी को EMI पर तौल लिए हैं।

वो कहती है “टाइम बदल गया है”,
मैं कहता हूँ “नीयत बदल गई है”।
पहले भूखे पेट भी हंस लेती थी,
अब सोने की थाली कम पड़ गई है।

डॉक्टर ने आँखें तो ठीक कर दीं,
पर दिल का अंधापन दे गया।
अब मोहब्बत को मोहब्बत नहीं,
इन्वेस्टमेंट नजर आता है।

काश वो अंधी ही रहती,
कम से कम सच्ची तो होती।
अब देखकर भी धोखा खाती है,
क्योंकि नोट गिनते-गिनते सो जाती है।

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)

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