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बचपन का वो दौर

बचपन का वो दौर न जाने गया किस ओर समझ नहीं आता है मचाऊं कैसे शौर।

क्योंकि जब से मैं जवान हुआ हूँ साहेब तब से मैं परेशान रहता हूँ साहेब।।

किसीसे कुछ कहाँ न जाए बचपन की वो बातें यही सोचकर हरदम हैरान रहता हूँ।

कास यह बचपन फिर से लौट आए सच कहता हूँ साहेब दिल खुशी से झूम उठेगा।।

लेकिन यही सच है साहेब मौत आ सकती है लेकिन बचपन नहीं लौट सकता है।।

क्योंकि यह जीवन एक सर्कल है जितना परेशान मैंने अपने माता पिता को किया है।

उतना ही परेशान अब हमारे बच्चे हमको करेंगें क्योंकि यही हकीकत है।।

क्योंकि हर किसीको बचपन चाहिए इसी लिए भगवान हर किसीको जन्म देतें हैं।

बस भगवान का शुक्रियादा किजिए की इंसान जन्म के बाद कोई दूसरा जन्म न हो।

चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,

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