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दिल की किताब ….

दिल की किताब में, तेरा ही नाम है,
हर एक धड़कन पर, तेरा पैगाम है।
कैसे कहूँ तुझसे, कितनी मोहब्बत है,
मेरे लिए तो बस, तू ही मेरा जहान है।

चुपके से आँखों में, सपने सजाए हैं,
तेरी ही यादों के, दीपक जलाए हैं,
लब कुछ नहीं कहते, दिल सब बता देता,
तेरे लिए कितने, अरमान छुपाए हैं।

राहों में तेरी ही, नज़रें बिछाए हैं,
हर मोड़ पर हमने, कदम भी रुकाए हैं,
तू पास हो या फिर, दूर कहीं लेकिन,
हर साँस में तेरे, एहसास समाए हैं।

इज़हार की घड़ी में, दिल ये काँपता रहा,
तेरे ही ख़यालों में, हर पल जागता रहा,
डर था कहीं तुझको, खो न दूँ मैं उम्र भर,
इस डर को सीने में, चुपचाप पालता रहा।

फिर एक दिन हिम्मत ने, हाथ मेरा थाम लिया,
दिल ने छुपे हुए, हर राज़ को बयान किया।
आँखों में तेरी जब, प्यार का उजाला मिला,
जैसे खुदा ने मेरी, हर दुआ को मान लिया।
   
इज़हार से खिलते हैं, रिश्तों के गुलाब भी,
सच्चे हों जज़्बात तो, मिटते हैं हिसाब भी,
दिल से जो निकल जाए, वो बात अमर होती,
मोहब्बत में सबसे सुंदर, होती है सच्ची बात ही।

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

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