
शिक्षित, संस्कारी मिसाइल मैन हमारे,
जन-जन को अब्दुल कलाम थे प्यारे।।
कानों में ध्वनि गूंजती थी जिनके,
भगवद्गीता के संस्कृत श्लोकों की।
डार्विन के सिद्धांतों को जिन्होंने पढ़ डाला,
भारत रत्न अब्दुल कलाम थे हमारे।।
विचार गूंज रहे हैं आज उनके गलियारों में,
मानवता की भावना संग वैज्ञानिक दृष्टिकोण।
कर्तव्य-कर्म कर रहे थे अपना प्रत्येक क्षण,
कार्य स्वयं सिद्ध हुआ, सफल हुए तब सारे।।
तुम जैसे प्रिय भारत रत्न,
मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध,
कीर्ति तुम्हारी यशस्वी रहे,
भारत के तुम लाड़ले प्रिय,
अब्दुल कलाम जी को समर्पित फूल सारे।।
अपनी असफलताओं को बनाकर
अपनी सफलताओं का माध्यम,
देशभक्ति की मशाल लिए
नित नए प्रयास किए निरंतर।
ऐ भारत! ऐसे रत्न हुए तुम्हारे।।
(भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को शत-शत नमन)
आशी प्रतिभा













