
घर घर में बिगड़ी अब संतान है,
कैसे कह दूं मैं भारत महान है।
डिस्को में मुन्नी अब बदनाम है,
शीला भी बरसों से जवान है।
जिस्मों और ठुमकों का गुणगान है,
फुकरे देवें संतो को ज्ञान है।
झूठों पे जग ये मेहरबान है,
कैसे कह दूं मैं भारत महान है।
रील्स की भूख में संस्कार भूले,
बुजुर्गों का अब कहाँ सम्मान है।
माँ-बाप वृद्धाश्रम में बैठे,
बच्चों को बस फोन का ध्यान है।
नशे में डूबी जवानी सारी,
हर गली में अब श्मशान है।
कैसे कह दूं मैं भारत महान है।
नेताओं के वादे खोखले निकले,
जनता ही जनता का अपमान है।
धर्म के नाम पे लड़ते लोग,
इंसानियत अब अनजान है।
सच बोलो तो देशद्रोही कहलाओ,
चुप रहो तो ही गुणगान है।
कैसे कह दूं मैं भारत महान है।
फिर भी इसी मिट्टी में भगत सिंह जले,
इसी धरती पर कलाम का ज्ञान है।
हर घर में कोई माँझी अब भी,
पहाड़ों को चीरे, ये ईमान है।
हजारों दीयों में एक बाती अब भी,
अंधेरे से लड़े, ये अरमान है।
कैसे कह दूं मैं भारत महान है।
बिगड़ी संतान सुधर भी सकती है,
अगर आइना दिखाए कोई इंसान है।
गाली से नहीं, तालीम से बदलेगा,
जब हर घर में जागे स्वाभिमान है।
तब गर्व से कहूंगा दुनिया से,
हाँ मेरा भारत देश महान है।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)













