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प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक

धर्म परायण के लिए, किए नित्य ही काम।
इसी हेतु प्रभु राम का,जन्म अयोध्या धाम।
जिनके पुण्य प्रताप से, हनुमत करते काज,
राम नाम के जाप का,मिले सुखद परिणाम।।

पूर्ण करें हर आस जो,रचते नव्य विधान।
धर्म-कर्म का कोष ले,करें दिव्यता दान।
शिक्षा शिक्षक से मिले, मात पिता से नाम।
सदा नमन गीता करें,तीनों श्रेष्ठ महान।।

इस अज्ञानी पर कृपा,करो वीर हनुमान।
कैसे करूंँ उपासना,मुझे न किंचित ज्ञान ।
कर दो बेड़ा पार प्रभु,अटकी हूंँ मझदार,
लिखती उर की भावना,पाने को वरदान।।

युगों-युगोंसे दे रहे, ऋषि मुनिवर शुभ ज्ञान।
पर सेवा सिद्धांत हो, सुंदर बने विधान।
उन पर शनि करते कृपा,जो चलते सत राह,
विपदा जड़ से मेटते, जग करता गुणगान।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
रायबरेली उत्तर प्रदेश

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