
एक बात बोलूं साहेब,जब बचपन में एक पिता के हाथों से एक रूपैया भी मिलता था
अगर किसी बच्चे को तो वह बच्चा बहुत खुश होता था और जमींन से ऊपर नीचे
उछलने लगता था लेकिन आज के समय में वह बच्चा लाख रूपैया भी कमा कर खुश
नहीं हैं मालूम है क्यों क्योंकि वह पैसा एक मजबूर पिता का था जो खुशी देता था
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













