
कल शाम सूचना मिली ब्राह्मण समाज के पूर्व अध्यक्ष शर्मा जी नही रहे
कल ही तो सुबह घूमते हुये पार्क में एक बेंच पर उनको अकेले देखा था
उदास थे कारण नही बताया मुस्करा कर बात करने लगे थे
शर्मा जी कई वर्षों तक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष रहे थे
परशुराम जयंति हर वर्ष बडी धूम धाम से मनाते रहे थे
सनातन संस्कृति की व्याख्या करते कभी अघाते न थे
उनके अकाट्य प्रवचन पूरे ब्राह्मण समाज को भाते थे
पर एकाएक शर्मा जी के व्यवहार में बदलाव आ गया था
पर शर्मा जी कभी भी अपनी चिंता चेहरे पर लाते न थे
बाहरी मन से मुस्कराते रहते और खुश नजर आते थे
पर अब वो पहले जैसा सनातन ज्ञान नही बांटते थे
कुछ पूछो तो टाल जाते ऐसी बातें जुवां पर न लाते थे
आज शोक व्यक्त करने जब उनके घर गया तो पता चला
उनकी नाजों पली इकलौती बेटी लव जिहाद में फंस गई थी
शर्मा जी जिस संस्कृति के पुरोधा थे उसे तार तार कर गई थी
इसी अवसाद से शर्मा जी कुंठित हो अपमान में जी रहे थे
संतान को यही दिन दिखाना था कहते फफक फफक रोते थे
नये जमाने के बच्चे हवा में उडते हैं पांव धरती पर नही टिकते
लव जिहाद के चक्कर में पडकर माता पिता की चिंता नही करते।
गोवर्धन थपलियाल









