
देख तमाशा दुनिया का।
रिश्ते नातों के मेले का।
खेल और खिलाड़ी का।
कुश्ती और हॉकी के खेलों का।
शतरंज की बाजी पलटने का।
हारकर भी जीतने वाले का।
दुनिया का खेल निराला है।
रिश्तों की अलग कहानी हैं।
जो अब तक देखा सुना न था।
वो अब जीवन की सच्चाई है।
कृत्रिम संसार का मेला है।
जहाँ पाप पुण्य का रेला है।
जीवन शतरंज का खेला है।
शह मात की तर्ज पर जीवन है।
कब किसका घोड़ा बाजी मार ले।
कब वजीर शतरंज की बाजी पलट दे।
जीवन मृत्यु की यह कटु सच्चाई है।
देख तमाशा दुनिया का।
रिश्ते नातों के मेले का।
नेकी का यह संसार नहीं।
सदाचार की यहाँ कोई कद्र नही।
सब पैसे रुपये का खेला है ।
देख तमाशा दुनिया का।
रिश्ते नातों के मेले का।
सांत्वना मिश्रा
नोएडा उत्तरप्रदेश









